मकर संक्रांति पर कविता। Poem on makar Sankranti in Hindi.

मकर संक्रांति का त्यौहार पूरे भारत वर्ष के अलावा विदेशो में भी कई जगहों पर मनाया जाता है। अलग अलग जगहों पर इसे अलग अलग नामों से जाना जाता है।

इस पोस्ट में हम आपके लिए लेकर आए हैं मकर संक्रांति पर कविता। इस कविता में कवि ने इस त्योहार पर की जाने वाली गतिविधियों से रूबरू कराने का प्रयास किया है।

Poem on makar Sankranti in Hindi लिखीं है मनजीत भावड़िया जी ने। जो कई अलग अलग तरह की अपनी कविताएं यहां प्रकाशित करवा चुके हैं।

poem on makar sankranti in hindi


मकर संक्रांति पर कविता। Poem on makar Sankranti in Hindi.

मकर सक्रांति का त्यौहार आया
सबके मन में खुशियां लाया
घर घर बांटी मिठाई
दुख दर्द सारे भूल गए
प्यार की परिभाषा आज
मीठा खाकर साथ में मूंगफलियों का स्वाद
यह मिठास बरकरार रहे
और प्यार रहे सदा
त्यौहार की मिठास जीभ पर नहीं
दिलों पर रहे
हम सब आज है पढ़ ले
भूले बिसरे अपने गम
सारे आज सही करें
ताकि इस समाज में
हमेशा दिल के अंदर मिठास और प्यार बरकरार रहे
मैं चाहता हूं इस दुनिया में सब
मनजीत ना करे किसी का बुरा
सारा जगत मैं प्रेम प्यार और भाईचारे पाठ पढ़ाए


कवि द्वारा इस कविता को पूर्ण रूप से स्वयं का बताया गया है। ओर हमारे पास इसके पुक्ते रिकॉर्ड्स है। कवि ने स्वयं माना है यह कविता उन्होंने किसी ओर वेबसाइट पर प्रकाशित नहीं करवाई है।

मनजीत भावड़िया

रचनाकार - खान मनजीत भावड़िया मजीद

गांव भावड तह गोहाना जिला सोनीपत हरियाणा

यह रही मकर संक्रांति  पर कविता। आशा करते है आपको यह कविता पसंद आई होगी।

इस कविता के बारे में अपने विचार comment करके हमें ज़रूर बताएं और अपने साथियों तक इसे अवश्य पहुंचाए 

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