गरीबी पर कविता। garibi par kavita in hindi.

गरीबी पर कविता। Garibi par kavita in hindi

गरीबी जिसे भूलकर भी नकारा नहीं जा सकता। वर्तमान समय में हमारे देश के साथ साथ विश्वभर की करोड़ो जनसँख्या इससे झूझ रही हैं। महंगाई के इस दोर में लाखों परिवार अपनी सामान्य जरुरत मंद की चीजों को भी अफ़्फोर्ड नहीं कर पाते हैं। स्तिथि यह हैं की कई व्यक्ति तो प्रतिदिन अपने भोजन का भी प्रबंधन नहीं  पाते हैं।

इसके बावजूद कोई इनकी सुनने वाला नही है। बड़ी बड़ी बातें करने वाले नेता को इनसे कोई मतलब नहीं है। और इस कविता में कवि मनजीत भावड़िया जी ने यही दर्शाने का प्रयास किया है।

आज हम  इस पोस्ट में आपके लिए लेकर आएं हैं गरीबी पर कविताgaribi par kavita in hindi. 

गरीब पर कविता


गरीबी पर कविता। poem on poverty in hindi

कविता:- कौन सुने...


इन मुफलिसों का क्या
इनका कोई गुजारा नहीं
नहीं इनकी सरकार
नहीं इनका शासन
क्या करें यह सब
जीना छोड़ दे
या मरने को मजबूर हो जाए
इन मुफलिसों का क्या...।

ना कोई विधायक इन से मुखातिब होता
ना कोई सांसद इन से मुखातिब होता
जब होता है
इन मुफलिस की वोट चाहिए
इनको खरीद लेते हैं
क्योंकि यह गरीब इतने हैं
किसी को दारू
किसी को खजाना
तक लुटवा देते हैं
ये सब ऐसा ही करते हैं
बाद में यह नजर तक नहीं आते
इन मुफलिसों का क्या....।

न इनकी  छोटी की कोई बात करता है
न इनकी रोटी की कोई बात करता है
न कोई घर बनवाया
न तन के लिए कपड़े की बात करता है
ना डॉक्टर की
ना शिक्षा की
ना विद्यालय की
क्यों करें इनकी बात
यह सब बड़े बन गए
मुफलिस तो मुफलिस है
इन मुफलिसों का क्या...।

यह रोते हैं तो
दो गज जमीन के लिए
जो नहीं मिलती
दो वक्त की रोटी के लिए
दो बाल्टी पानी के लिए
दो कॉपी के लिए
दो पेंसिल के लिए
क्योंकि यह मुफलिस है एप्स
इन मुफलिसों  का क्या ...।

न इन के पास बस्ता है
ना इन का राशन सस्ता है
दिन प्रतिदिन हालत खस्ता है
क्योंकि यह मुफलिस है
इन मुफलिसों का क्या...।

खान मनजीत जो पूरी हो इनकी ख्वाहिश
यह भी तो बनना चाहते हैं सांसद और विधायक
ये जो बड़े बैठे हैं कुर्सी पर नालायक
मैं इनकी होने देते कहीं पलायन
क्योंकि यह मुफलिस है
इन मुफलिसों का क्या ...।

इन्हें मंजिल बनाई
पटरिया बिछाई
सड़क तक बनवाई
फिर चलते तक नहीं
क्योंकि यह मुफलिस है
इन मुफलिसों का क्या...।

न साधन है
न गाड़ी है
फिर कौन सुने
सरकार भी मौन
प्रशासन भी मौन
इनके लिए शिक्षा भी मौन
स्वास्थ्य मौन
सुने कौन
सुने कौन
तुम बताओ
सुने कौन
यह मुफलिस है
इन मुफलिसों का क्या...।
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गरीब पर कविता। Garibi par kavita

कविता:- मुफलिस

इन मुफलिसों के मकानों में भी जाकर देखो,
इनके पास समय बिता कर भी देखो,
इनके घर का खाना खाकर भी तो देखो,
फिर कहना मुझे जन्नत मिल गई ।

इन से हाथ मिलाकर तो देखो,
इन की पीड़ा जानकर तो देखो,
इन की समस्या को पाकर तो देखो,
फिर कहना मुझे जन्नत मिल गई।

इन के हाथ की रोटी खा कर तो देखो,
इन की खाट पर आराम करके तो देखो,
इन की फुटपाथ वाली जिंदगी बिताकर तो देखो,
फिर कहना मुझे जन्नत मिल गई।

इन की पोशाक पर नजर दौड़ाकर तो देखो,
पसीने से लथपथ काया पर नजर डाल कर तो देखो,
भुखे बच्चे और बीवी को प्यार करके तो देखो,
फिर कहना मुझे जन्नत मिल गई।

इन के फूंस के घर में रहकर तो देखो,
लिप हुए फर्श पर लेटकर तो देखो,
इनकी हांडी की सब्जी खाकर तो देखो,
फिर कहना मुझे जन्नत मिल गई।

इनके पशुओं को चारा डालकर तो देखो,
इन की बैलगाड़ी को हांक कर तो देखो,
खान मनजीत की बात मान कर तो देखो,
फिर कहना मुझे जन्नत मिल गई।
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कवि द्वारा इस कविता को पूर्ण रूप से स्वयं का बताया गया है। ओर हमारे पास इसके पुक्ते रिकॉर्ड्स है। कवि ने स्वयं माना है यह कविता उन्होंने किसी ओर वेबसाइट पर प्रकाशित नहीं करवाई है।

रचनाकार - खान मनजीत भावड़िया मजीद

गांव भावड तह गोहाना जिला सोनीपत हरियाणा

यह रही गरीबी पर कविता। आशा करते है आपको यह कविता समझ में आई होगी। और गरीबी और नेताओं की स्थिति से भी अवगत हुए होंगे।

इस कविता के बारे में अपने विचार comment करके हमें ज़रूर बताएं और अपने साथियों तक इसे अवश्य पहुंचाए 

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