मां का प्यार कविता - मां के हाथ की स्वेटर

मां का प्यार कविता - मां के हाथ की स्वेटर

मां के हाथ की स्वेटर

कविता

मेरी आँखों के ऊपर
मेरे माथे पर टिकी पट्टी
आंखों के ऊपर सजी पट्टी
मैं अपना सिर ऊपर खींचता हूं।

मेरे बाल एक लहर 
मेरे मां की बनी स्वेटर
जैसे ही मैं अपना स्वेटर खींचता हूं।
तभी मेरा तन बदन के अंदर
फैली गर्मी की आहट

 बर्फ जमीन की ओर गिरती है
 बारिश के मोतियों की माला में
 मैं पेट की तरह गर्म रहता हूँ
 मेरे स्वेटर में एक बिल्ली की
छपी तस्वीर और कुछ फूल 
जो बचाने की कोशिश करते हैं
पर्यावरण।

कार के इंजन जितना गर्म
जो एक तेज़ धुंध में धधक रहा है
मेरे ऊन में मुलायम स्वेटर
एक साथ बुना हुआ गले लगाओ
मेरी मां की बनी स्वेटर

मैं रहूँगा 
मेरा स्वेटर
पूरी गर्मी की आहट के साथ

मनजीत भावड़िया

कवि द्वारा इस गीत को पूर्ण रूप से स्वयं का बताया गया है। ओर हमारे पास इसके पुक्ते रिकॉर्ड्स है। कवि ने स्वयं माना है यह कविता उन्होंने किसी ओर वेबसाइट पर प्रकाशित नहीं करवाई है।

रचनाकार - मनजीत भावड़िया

हरियाणा

आशा करते हैं आपको यह कविता पसंद आईं होंगी। ओर आपको अच्छी लगी होगी।

अतः आप इस सुंदर सी कविता के बारे में अपने विचार comment करके बताएं व अपने दोस्तों, साथियों व रिश्तेदार के साथ, निचे दिख रहें share बटन की सहायता से अवश्य पहुंचाए।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ